Wednesday, September 02, 2015

चिठ्ठी ना कोई संदेस, जाने वो कौनसा देस / Chitti na koi sandesh

जहां तुम चले गए
इस दिल पे लगा के ठेंस  जाने वो कौन सा देस
जहां तुम चले गए

एक आह भरी होगी, हम ने ना सूनी होगी
जाते जाते तुम ने आवाज तो दी होगी
हर वक्त यही हैं गम  उस वक्त कहा थे हम कहा तुम चले गए

हर चीज पे अश्कों से लिखा हैं तुम्हारा नाम
ये रस्ते घर गालीयाँ, तुम्हें कर ना सके सलाम
हाय दिल में रह गयी बात  जल्दी से छुडाकर हाथ  कहा तुम चले गए

अब यादों के कांटे, इस दिल में चुभते हैं
ना दर्द ठाहरता हैं, ना आंसू रुकते हैं

anand bvakshi

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