Wednesday, September 02, 2015

humsafar

हम सफ़र बनके हम साथ हैं आज भी
फिर भी है ये सफ़र अजनबी अजनबी
राह भी अजनबी मोड़ भी अजनबी
जाएँ हम किधर अजनबी अजनबी

जिन्दगी हो गयी है सुलगता सफ़र
दूर तक आ रहा है धुआं सा नज़र
जाने किस मोड़ पर खो गयी हर ख़ुशी
देके दर्द-ए-ज़िगर अजनबी अजनबी

हमने चुन चुन के तिनके बनाया था जो
आशियाँ हसरतों से सजाया था जो
है चमन में वही आशियाँ आज भी
लग रह है मगर अजनबी अजनबी

किस को मालूम था दिन ये भी आएंगे
मौसमों की तरह दिल बदल जायेंगे
दिन हुआ अजनबी रात भी अजनबी
हर घड़ी हर पहर अजनबी अजनबी

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